बिहार इस समय गंभीर एयर पॉल्यूशन की मार झेल रहा है। खासकर राजधानी पटना, जो लगातार देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल हो रहा है। सर्दी की शुरुआत के साथ ही हवा में प्रदूषण का स्तर अचानक बढ़ जाता है और AQI कई बार 300–400 तक पहुंच जाता है, जो “गंभीर” श्रेणी माना जाता है। यह स्थिति न केवल वातावरण के लिए, बल्कि करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरे की घंटी है।

प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण

बिहार में वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई वजहें हैं। सबसे पहले, तेज़ी से बढ़ती वाहनों की संख्या और उनसे निकलने वाला धुआँ हवा को जहरीला बना रहा है। इसके साथ ही पटना, गया और मुजफ्फरपुर जैसे शहरों में जारी निर्माण कार्य, सड़कों पर जमा धूल, और छोटे-बड़े उद्योगों का धुआँ प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं। ग्रामीण इलाकों में अब भी पराली जलाने की प्रथा जारी है, जिसका सीधा असर हवा की गुणवत्ता पर पड़ता है। सर्दी के मौसम में हवा नीचे जम जाती है, जिससे प्रदूषक ऊपर नहीं उठ पाते और वातावरण और ज्यादा दूषित हो जाता है।

स्वास्थ्य पर गंभीर असर

इस बढ़ते प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर दिखाई दे रहा है। अस्थमा, खाँसी, गले की जलन, आंखों में पानी आना और साँस लेने में दिक्कत जैसे मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक ऐसे प्रदूषण में रहने से हार्ट डिजीज और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियाँ भी बढ़ सकती हैं।

क्या हो सकता है समाधान?

सरकार को सड़क सफाई, डस्ट कंट्रोल और निर्माण कार्यों पर सख्ती की आवश्यकता है। साथ ही, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर निगरानी बढ़ाना जरूरी है। आम लोगों को भी जागरूक होकर मास्क का उपयोग करना चाहिए और घरों के आसपास पेड़-पौधे लगाने चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *